भीमा कोरेगांव हिंसा में गिरफ्तार किये गये 5 बुद्धिजीवियों को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका !

इस साल की शुरुआत में महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में जातीय हिंसा हुई थी, उस हिंसा से जुड़े तार को लेकर महाराष्ट्र पुलिस ने पांच बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया था. इस गिरफ़्तारी को लेकर वामपंथी खूब बवाल काट रहे थे. उनका कहना है कि यह सरकार लोगों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था उनमें, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरनान गोंजाल्विस वरवर राव और अरुण फरेरा शामिल हैं. इन सभी को महाराष्ट्र पुलिस ने अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया था.

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इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस का कहना है कि इन सभी का भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा से तार जुड़े हुए हैं. हालाँकि देश में तमाम विरोधी दल, खासकर वामपंथी इस आरोप का खंडन कर रहे हैं. इनकी गिरफ्तारी का मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो न्यायालय ने पुलिस से सवाल करते हुए इन्हें पुलिस कस्टडी से हाउस कस्टडी में रहने का आदेश दिया.

महाराष्ट्र पुलिस द्वारा हुई इस कार्रवाई में SIT जांच की मांग की गयी थी जिसपर अब सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने इस मांग को ख़ारिज कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने फैसले में साफ़ कर दिया कि, “कोर्ट इनकी गिरफ्तारी में कोई हस्तपक्षेप नहीं करेगी. इतना ही नहीं कोर्ट ने SIT से जांच कराने वाली याचिका को भी ठुकरा दिया है.”

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इसके उलट कोर्ट ने इन पांचों के नजरबंद होने की सीमा को बढ़ा दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि “इन पांचों की नजरबंदी अगले 4 चार हफ़्तों के लिए बढ़ाई जाती है.” हालाँकि ये सभी अपनी राहत के लिए ट्रायल कोर्ट जा सकते हैं. कोर्ट ने इस मामले में पुणे पुलिस को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है.