गुजरात राज्यसभा चुनाव को लेकर सोनिया गांधी ने लोकसभा में जो कहा उसके बाद बवाल जरूर मचेगा!

9 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में एक विशेष चर्चा बुलाई गयी. इस विशेष चर्चा में आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर देश को आज़ाद कराने वाले आन्दोलनकारियों को याद किया गया. प्रधानमंत्री ने इस मौके पर उन तमाम देशभक्तों को याद किया जिन्होंने देश को आज़ाद कराने के लिए अपना प्रमुख योगदान दिया. इस मौके पर सोनिया गांधी भी सदन में मौजूद रहीं और उन्होंने भी इस विशेष चर्चा पर भाषण दिया. उन्होंने कहा कि ‘उन्हें ख़ुशी और गर्व है कि वो सदन में खड़ी होकर आज़ादी के आन्दोलन के बारे में बोल रही हैं.’

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आपको बता दें कि सोनिया गाँधी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु को याद करते हुए उनके द्वारा दिए गये सहयोग को बताया. इस दौरान उन्होंने सदन में कहा कि कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने आज़ादी के लिए जान दी और 8 अगस्त 1972 को महात्मा गाँधी और नेहरु के अगुवाई में देश को आज़ाद कराने का संकल्प लिया गया.

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सोनिया गांधी का भाषण यहां तक निर्विरोध चलता रहा लेकिन मामला तब गर्म हो गया जब उन्होंने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ों आन्दोलन’ का जिक्र करते हुए RSS का नाम लिए बिना कुछ ऐसा कह दिया जिससे सदन में सत्ता पक्ष के कुछ सदस्य विरोध दर्ज कराने लगे.

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सोनिया गाँधी ने कहा कि ‘जब देश को आज़ाद कराने के लिए भारत छोड़ो आन्दोलन किया जा रहा था तब कुछ ऐसे संगठन और कुछ लोग ऐसे भी थे जो इस आन्दोलन का विरोध कर रहे थे और उन लोगों, संगठनों का देश की आज़ादी में कोई योगदान रहा. ऐसे लोगों की वजह से हमारा देश अन्धकार में जा सकता था.’ उन्होंने उस परिवेश को आज से जोड़ते हुए कहा कि ‘क्या आज हमारा देश अंधकार में नही जा रहा है क्या ?’

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सोनिया गाँधी ने कहा कि ‘जिन संगठनों ने देश की आज़ादी में कोई योगदान नही दिया और ऐसे लोग देश को अंधकार में ले जायेंगे, जिसपर हमें सोचना होगा’ उनके इतना कहते ही बीजेपी विधायकों की तरफ से आवाजें आने लगी और विरोध जताने लगे.

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वहीं अगर आरएसएस की बात करें तो खुद देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने इस संगठन की समर्पण और देशभक्ति भावना को देखते हुए इसकी तारीफ की थी. देशप्रेम भावना से इस संगठन ने आपदा और देश के मुश्किल समय में सामने आकर मदद करने का उदाहरण पेश किया है. ऐसे में इस संगठन से सोनिया गांधी की नफ़रत साफ झलकती है.

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सोनिया गाँधी ने कहा कि, ‘ऐसे लोग देश विभाजनकारी नीति से काम कर रहे हैं, और अपनी संकीर्ण मानसिकता से देश को पीछे धकेल रहे हैं, हमें ऐसे लोगों को रोकना होगा और इनसे लड़ना होगा.’

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आपको बता दें कि ये विशेष चर्चा देश की आज़ादी के लिए थी और पीएम मोदी ने देश को एक होने और देशहित में काम करने को लेकर अपने विचार सदन में रखे लेकिन जब सोनिया गांधी की बारी आई तो वो थोड़ी देर तो आज़ादी आन्दोलन पर बोलती रहीं लेकिन बाद में अपनी राजनीति के चक्कर में आरएसएस पर निशाना साधने लगीं.

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आपको बता दें कि इस वक्त आरएसएस से जुड़े हुए तीन लोग देश के प्रमुख पदों पर आसीन हैं, जिनमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शामिल हैं. सोनिया गाँधी द्वारा दिए गये ऐसे बयान पर बवाल मचना तय है लेकिन देखना यह है कि बीजेपी सोनिया गाँधी के इस बयान का जवाब किस तरीके से देती है.