सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ‘नमाज’ को लेकर ऐसा फैसला कि उसका असर ‘राम मंदिर विवाद’ पर पड़ सकता है !

राम मंदिर निर्माण को लेकर विवादों का दौर जारी है, अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, और इस पर लगातार सुनवाई 29 अक्टूबर से होगी. इस मामले में भी कई अलग-अलग केस बनाये गये हैं. एक विवाद मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर है. जिसपर 1994 में ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला दिया गया था कि इस्लाम में नमाज जरुरी है लेकिन मस्जिद में ही नमाज पढ़ी जाए ये इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है. इसको लेकर एक मुस्लिम पक्षकार की तरफ से वकील राजीव धवन ने पिटीशन दायर की थी जिसमें कहा गया कि 1994 में दिए गये फैसले कि “मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है” इसपर फिर से पुनर्विचार किया जाय.

फोटो सोर्स: स्क्रॉल

बता दें कि इस अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्ववत फैसले को बरक़रार रखते हुए कहा है कि ‘मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है.’ इस फैसले को देखते हुए माना जा रहा है कि ये मुस्लिम पक्षकारों के लिए एक झटका है.

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2010 में ही इलाहबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए जमीन को तीन हिस्सों में बांटा था

दरअसल राम जन्मभूमि विवाद पर 30 सितंबर 2010 में ही इलाहबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए जमीन को तीन हिस्सों में बांटा था. जिसमें तीन हिस्सों में से जहाँ अभी रामलला विराजमान हैं, उसे हिन्दुओं को दिया. वहीं दूसरे हिस्से को निर्मोही अखाड़े को दिया. जिसमें सीता रसोई और राम चबूतरा स्थित है, बाकी बचे तीसरे हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया.

इलाहाबाद हाई कोर्ट (फोटो सोर्स: इंडिया टुडे)

इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्षकार सुप्रीम कोर्ट गये और मामला अभी वहां लंबित है. जिसपर 29 अक्टूबर से सुनवाई होनी है. अब कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नमाज और मस्जिद पर दिए गये फैसले का असर आने वाले फैसलों पर भी पड़ सकता है.