जानिये क्या अगरबत्ती जलाने से होता है नुक्सान?

अगरबत्ती का उपयोग लगभग प्रत्येक भारतीय घर, दुकान तथा पूजा-अर्चना के स्थान पर अनिवार्य रूप से किया जाता है। हमारे शास्त्रों में पूजन-अर्चन के लिए विभिन्न विधियां बताई गई हैं। इन्हीं विधियों का एक महत्वपूर्ण अंग है भगवान कोअगरबत्ती लगाना या घर में लोबान,या गुग्गल जलाकर सुगंधित धुआं करना।

हाल ही में एक रिसर्च के बाद यह जानकारी सामने आई कि ज्यादातर पूजा पाठ में इस्तेमाल होने वाली सुगंधित अगरबत्ती सेहत के लिहाज से खतरनाक होती है। असल में यह एक भ्रामक प्रचार है। भारत की अगरबत्ति‍यों की सप्लाई कई देशों मेंहोती है, जहां इन्हें कड़े टेस्ट से गुजरना पड़ता है। भारत में प्राचीन काल से ही प्राकृतिक तौर पर उपलब्ध सुगंधित लकड़‍ियों का इस्तेमाल होता रहा है। ऐसी लकड़‍ियों में चंदन, अगर, तगर आदि प्रमुख हैं। ये महंगी जरूर होती हैं, पर केमिकलसे रहित होने की वजह से सेहत के लिए हानिकारक नहीं हैं। इसी तरह अगरबत्ती को बनाने में भी विभिन्न सुगंधों जैसे चंदन, केवड़ा, गुलाब, गुग्गुल आदि का इस्तेमाल किया जाता है।

एक दूसरा भ्रामक प्रचार यह भी किया जाता है कि बांस को जलाना नहीं चाहिए, जो कि सरासर गलत प्रचार है। असल में भारतीय परपंरा के अनुसार यज्ञ और हवन में लकड़ी का उपयोग ही उचित माना गया है और घास आदि का प्रयोग वर्जितहै। बांस कोई लकड़ी नहीं है, वह एक घास के रूप में उगता है और उसे वैज्ञानिक रूप से भी घास ही माना गया है। इसलिए यज्ञ में कभी भी बांस का उपयोग नहीं किया जाता। लेकिन कुछ लोगो ने साजिस के तहत पहले तो यह भ्र्म फैलाया किअगरबत्ती बांस से बनती है इसलिए उसे नहीं जलाना चाहिए। लेकिन जब इस अभियान से बात नहीं बनी तो यह भ्र्म फैलाया गया कि अगरबत्ती जलाने से कैंसर फैलता है।

हमारा आपसे यहीं अनुरोध है कि इन प्रचारों के जाल में न फंसे और अपने विवेक का इस्तेमाल करें।

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