चीन फिर कर रहा है मनमानी करने की कोशिश, सैन्य साजोसामान के साथ चीनी सेना तिब्बत..

भारत और चीन के बीच कुछ समय से सीमा विवाद गहराता चला जा रहा है. सीमा पर अतिक्रमण करने के लिए एक तरफ चीन द्वारा भारत को पीछे हटने को कहा जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर भारत चीन को उसकी मनमानी करने से रोक रहा है. इस विवाद को लेकर चीन और भारत के मीडिया में भी कई ख़बरें आ चुकी हैं. चीन के सरकारी अखबार में भारत को धमकाने के लिए बहुत सी ख़बरें छापी गईं. वहीं भारत में भी चीन की मनमानी के खिलाफ खूब लिखा गया.

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अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन

भारत और चीन के बीच अभी भी तनातनी बनी हुई है, भारत की बढ़ती शक्ति को देखकर चीन के माथे पर बल पड़ गए हैं वो कुछ भी करके भारत को खुद से कम दिखाने की कोशिश कर रहा है. इसी वजह से वो आए दिन भारत की सीमा पर अतिक्रमण करने की कोशिश कर रहा है. जहाँ एक ओर भारत की सिक्किम से लगी सीमा पर चीन मनमानी करने की कोशिश कर रहा है वहीं दूसरी ओर हिंद महासागर में भी चीन अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाने में लगा हुआ है. इस मामले में अब भारत भी पूरी तरह से चौकन्ना हो चुका है. चीन की नापाक हरकतों पर भारत की पैनी नज़र है.

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तिब्बत पहुँच रहा है सैन्य साजोसामान 

आपको बता दें कि डोकलाम को लेकर जो तनातनी चल रही उसपर विवाद धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. इसी बीच खबर आ रही है कि चीन ने तिब्बत में सैन्य अभ्यास के बहाने हज़ारों टन सैन्य साजोसामान भेज दिया है. मीडिया में आई ख़बरों की मानें तो ये इज़ाफा सिक्किम की सीमा के पास नहीं बल्कि पश्चिम में शिनजियांग प्रांत के पास उत्तरी तिब्बत की तरफ किया गया है.

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देखा जाए तो चीन यादोंग से लेकर ल्हासा तक फैले अपने रेल और सड़क नेटवर्क का इस्तेमाल कर के इस सैन्य साजोसामान को नाथू-ला जो कि सिक्किम सीमा के निकट है तक पहुंचा सकता है. एक्सप्रेसवे नेटवर्क के चलते चीन की सेना लगभग 700 किलोमीटर की यह दूरी केवल छह से सात घंटे में तय कर लेगी.

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चीन की सेना के अखबार PLA डेली के हवाले से साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट में खबर छपी है जिसमें लिखा गया है कि, ‘ अशांत तिब्बत और शिनजियांग प्रांत में पश्चिम थिएटर कमांड द्वारा उत्तरी तिब्बत के कुनलुन पर्वतों के दक्षिण में सैन्य साजोसामान भेजा गया है लेकिन इसकी जानकारी नहीं दी गई है कि साजोसामन की यह तैनाती उसके सैन्य अभ्यास के लिए है या इसके पीछे कुछ दूसरा कारण है, लेकिन जिस तरह की स्थिति भारत-चीन के बीच बनी हुई है तो ये कहना गलत नहीं होगा कि चीन कोई नापाक हरकत भी कर सकता है. वहीँ दूसरी ओर एक अखबार में ये बात भी लिखी गई है कि कूटनीतिक वार्ताओं को सैन्य तैयारियों का साथ भी दिया जाना चाहिए.

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चीन की नापाक हरकतें बंद होने का नाम नहीं ले रही हैं. वो कहता कुछ है और करता कुछ और है. उसके द्वारा जो भी काम किया जा रहा है उसके पीछे सबसे बड़ी वजह है उसकी पूँजीवादी सोच. वो एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है इसी वजह से अपने पड़ोसी मुल्कों पर दबाव बना रहा है. चीन पड़ोसी मुल्कों की सीमाओं पर अतिक्रमण करने की कोशिश करता है और जब वो देश उसके खिलाफ कदम उठता है तो चीन प्रताड़ित किये जाने वाले देश को ही दोषी करार दे देता है. हालांकि ये बात तो साफ़ है कि चीन चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले वो किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकता और खासकर भारत का तो बिलकुल नहीं क्योंकि भारत से उसके कई स्वार्थ जुड़े हैं और ऊपर से भारत आज के दौर में इतना शक्तिशाली हो गया है कि चीन भारत पर अगर युद्ध थोपता है तो उसको बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.