तो ये वजह थी जिसके चलते 69 साल तक भारत के 15 प्रधानमंत्रियों में से एक ने भी इजरायल जाने की हिम्मत नहीं दिखाई?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिनों के इजरायली दौरे पर हैं| पीएम मोदी का ये दौरा ना सिर्फ केवल ऐतिहासिक है बल्कि इस दौरे के दौरान कई दिल को छू लेने वाली बात भी सामने आई. बता दें कि अपने घनिष्ठ मित्र का भव्य स्वागत करने के लिए इजराइल के  पीएम बेंजामिन नेतन्याहू खुद एअरपोर्ट पर मौजूद दिखे. यही नहीं पीएम के इजरायल पहुँचते ही देश और दुनिया ने एक ऐसा नज़ारा देखा जिसे देखकर लगा कि मानो दो देशों के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि दो बिछड़े दोस्त सदियों बाद एक दूसरे से मिले हो. यहाँ हम आपको ये भी बता दें कि पीएम मोदी के भव्य स्वागत के दौरान ही कुछ ऐसा हुआ जिसपर वहां मौजूद सभी की निगाहें टिक गयी.

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इजराइल के प्रधानमंत्री ने अपने सीने पर लगाया हुआ था भारत का तिरंगा 

पीएम मोदी के इसी दौरे के दौरान एक ऐसा वाकया या यूँ कहिये एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिस पर सबकी निगाहें मानो थम सी गयी. भारत और इजरायल के लिए जहाँ ये दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है वहीँ दूसरी तरफ इजरायल के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी से मुलाक़ात के दौरान कुछ ऐसा कर दिया जिसे देखकर आप भी ख़ुश हो जायेंगे. दरअसल इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने अपने सूट पर भारत का ब्रोच लगाया हुआ था.

…लेकिन इन सब बातों के बीच एक बड़ी बात ये निकल कर सामने आती है कि आखिर आजतक कोई भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल क्यों नहीं गया? 

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देश के ये बड़े नेता भी जा चुके हैं इज़राइल लेकिन…

हालाँकि पीएम मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन चुके हैं जिन्होंने इज़राइल का दौरा किया है, लेकिन इनसे पहले लगभग दो साल पहले देश के मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी इज़राइल के एअरपोर्ट पर उतरे थे. राष्ट्रपति उतरे एअरपोर्ट पर उतरे जरुर थे लेकिन वो पहले फिलिस्तीन गए और उसके बाद इज़राइल दौरे पर गए थे. इसके बाद साल 2016 में जनवरी महीने में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी पहले फिलिस्तीन गयीं और उसके बाद उन्होंने इज़राइल का दौरा किया लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल पहुंचेंगे तो तीन दिन सिर्फ-और-सिर्फ इजरायल में ही गुजारेंगे.

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लेकिन सवाल अभी भी वो ही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पहले किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायल जाने की या उनसे संबंध सुधारने की पहल क्यों नहीं की?

कुछ इस तरह से हुई थी इजरायल और भारत की दोस्ती

इतिहास के पन्ने पलट कर देखें तो 1991 में सोवियत संघ रूस का विघटन हुआ और भारत के आर्थिक सुधार के तहत अमेरिकी संबंधों के दरवाजे खोले इसमें अमेरिकी संबंधों की छाव में इजरायल और भारत के करीबी रिश्ते बनने की शुरूआत हुई.  यहाँ ये बात गौर करने वाली है कि 29 जनवरी 1992 को फिलिस्तीन के राष्ट्रपति यासिर अराफात की अनुमति के बाद ही भारत ने इज़राइल के साथ अपने संबंध मज़बूत बनाने शुरू किये.  रिश्ता बने तो 25 साल बीत गए लेकिन किसी ने कभी इज़राइल जाकर रिश्तों को सींचने की कोशिश नहीं की. इन 25 सालों में ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत का कोई प्रधानमंत्री इज़राइल दौरे पर गया है.

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तो ये है वो वजह जिसके चलते कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री कभी भी इजरायल दौरे पर नहीं गया

इस सवाल का जवाब जितना मुश्किल है उतना ही ज़रूरी भी. तो हम आपको बता दें कि बीबीसी में छपे एक लेख के मुताबिक,  भारत और इजरायल के संबंध के जानकार आफ़ताब कमाल पाशा ने बताया कि दरअसल जिस वजह से अबतक भरता के सभी प्रधानमंत्री इजरायल जाने से बचते रहे हैं वो बड़ी वजह ये है भारत की खुद की घरेलु स्थिति.

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देश के मुसलमानों को नाराज़ नहीं करना चाहती थी  कोई पार्टी?

आफ़ताब बताते हैं कि जिस वक़्त भारत और इजरायल के बीच संबंधों की शुरुआत हुई उस वक़्त देश में गठबंधन का दौर सा शुरू हो चुका था और ऐसे में कोई भी पार्टी देश के मुस्लिम तबके को नाराज़ कर किसी तरीके का कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती थी और इसी वजह से अबतक किसी भी प्रधानमंत्री ने इजरायल जाने की सुध ही नहीं ली.

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बात करें अगर इसराइल और फ़लीस्तीनी क्षेत्र के बीच चल रहे विवाद की तो इसका इतिहास  भारत की आज़ादी से भी पुराना माना जाता है और यहाँ ये बात भी गौर करने वाली है कि भारत हमेशा से ही अरब देशों का मददगार रहा है.

वोटबैंक नहीं खोना चाहती थी कांग्रेस

यहाँ इजरायल से दूरी बनाये रखने के पीछे एक और बड़ी वजह ये निकल कर आ रही है कि कांग्रेस पार्टी इजरायल के बनने से ही खफ़ा थी. आज़ादी से लेकर अबतक देश में सबसे ज्यादा समय के लिए कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में रही है और उन्होंने हमेशा इसी मानसिकता को बढ़ावा दिया है कि अगर वो इजरायल के नज़दीक आये तो इसका सीधा मतलब अरब देशों को खफ़ा करना होगा और अगर गलती से भी ऐसा होता है तो इसका सबसे बड़ा झटका उनके वोटबैंक पर पड़ेगा जो कांग्रेस पार्टी किसी भी हालत में नहीं होने देना चाहती थी.

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बीजेपी को नही है ऐसा कोई डर क्योंकि…

अब पीएम मोदी के इस दौरे के बाद सवाल उठता है कि क्या पीएम मोदी या बीजेपी को इस बात का डर नहीं है कि वो देश के मुसलमानों को अपने इस कदम से नाराज़ कर देंगे तो हम आपको बता दें कि पीएम मोदी,  बीजेपी को किसी वोटबैंक की ज़रूरत ही नहीं है| या यूँ कहिये उन्होंने देश की जनता में से किसी ‘ख़ास धर्म’को कभी वोटबैंक की तरह इस्तेमाल ही नहीं किया, इसका एक उदाहरण देश में 2014 को हुए चुनाव के नतीजे ही हैं|

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